पहले विचार समझें।फिर देखें शास्त्रों ने उसे कैसे देखा।
वेद वर्स प्रबंध की अवधारणाओं को सरल भाषा में, एक-एक विचार करके समझाता है। जहाँ भारत का कोई शास्त्रीय ग्रंथ उसी समस्या से मिलता है, वहाँ उस अंश को उसके संदर्भ के साथ विचार के पास रखता है, ताकि आप देख सकें कि बात कितनी पुरानी है, पुराना पाठ क्या जोड़ता है और दोनों कहाँ अलग हैं। यह सबके लिए खुला है; साइन-इन की ज़रूरत नहीं।
अभी हिंदी में क्या है
यह हिंदी संस्करण का पहला भाग है: यह परिचय, पाँच चरणों की सैर, कुछ शब्द जिनका अनुवाद ठीक से नहीं होता, और इकाई 1 (प्रबंध और प्रबंधकीय अर्थशास्त्र) की पूरी शब्दावली। अध्याय, अभ्यास और बाक़ी उपकरण अभी अंग्रेज़ी में हैं। अनुवाद की समीक्षा चल रही है; कोई त्रुटि दिखे तो बताएँ।
अंश कैसे चिह्नित हैं
- प्रलेखित
- अंश किसी नामित ग्रंथ में है, और आधुनिक अवधारणा उसकी उचित व्याख्या है।
- व्याख्या
- एक व्याख्यात्मक समानता। ग्रंथ आधुनिक अवधारणा की बात नहीं करता; यह संबंध चिंतन के लिए दी गई एक व्याख्या है, लेखकों के आशय का दावा नहीं।
अनुवाद भावानुवाद हैं। किसी अंश को कहीं उद्धृत करने से पहले उसका संदर्भ अपने संस्करण से मिला लें।
ग्रंथ
अध्याय 21 ग्रंथों और कवियों से अंश लेते हैं। इनमें तीन सबसे अधिक: तिरुक्कुऱळ, भगवद्गीता और कौटिल्य का अर्थशास्त्र। हर ग्रंथ के पन्ने पर (अंग्रेज़ी में) बताया गया है कि वह क्या है, कब और किसने रचा, उसमें क्या विवादित है, और अध्याय उससे कौन-से अंश लेते हैं।
The texts (in English)आगे कहाँ जाएँ
- पाँच चरणों की सैर: पाँच आधुनिक विचार, हर एक उस अंश के पास जिसने वही समस्या देखी।
- शब्दावली: इकाई 1 के शब्द हिंदी और अंग्रेज़ी में, और धर्म, अर्थ, कर्म जैसे शब्दों का अर्थ।
- अध्याय (अंग्रेज़ी में): हर अवधारणा, जहाँ कोई अंश उससे मिलता है वहाँ उस अंश के साथ।
- कहाँ से शुरू करूँ? (अंग्रेज़ी में): हर इकाई से कुछ प्रश्न, फिर बताया जाता है कि कहाँ से पढ़ना शुरू करें।